तीन दिनों की तेजी के बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: निफ्टी 420 अंक फिसला, सेंसेक्स 75,300 के आसपास
भारतीय शेयर बाजार में पिछले तीन दिनों से लगातार तेजी देखने को मिल रही थी, लेकिन आज बाजार ने अचानक यू-टर्न ले लिया। कारोबार की शुरुआत में ही निफ्टी करीब 420 अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि सेंसेक्स भी गिरकर लगभग 75,300 के आसपास पहुंच गया। इस गिरावट ने निवेशकों को हैरान कर दिया क्योंकि हाल ही में बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली थी और कई सेक्टरों में लगातार खरीदारी हो रही थी। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियां, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुनाफावसूली (profit booking) जैसे कारण इस गिरावट के पीछे हो सकते हैं।
क्यों टूटा बाजार
शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं बल्कि कई वैश्विक और घरेलू कारकों के कारण आई है। सबसे पहला कारण हाल के दिनों में बाजार में आई तेज़ी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफा निकालना है। जब बाजार लगातार ऊपर जाता है तो कई निवेशक अपने शेयर बेचकर लाभ सुरक्षित कर लेते हैं। इससे बाजार में दबाव बन जाता है। दूसरा कारण वैश्विक बाजारों की कमजोरी माना जा रहा है। अमेरिका और यूरोप के बाजारों में हाल के दिनों में अस्थिरता देखी गई है जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
मध्य पूर्व तनाव का असर
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। जब भी दुनिया में युद्ध या भू-राजनीतिक संकट बढ़ता है तो निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं और सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। इसका असर अक्सर शेयर बाजार पर दिखाई देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है।
कच्चे तेल की कीमतें भी चिंता का कारण
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी भारतीय बाजार के लिए एक बड़ा कारक है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है। अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।
महंगा तेल:
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महंगाई बढ़ा सकता है
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रुपये को कमजोर कर सकता है
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कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है
इसी वजह से तेल की कीमतों में तेजी आने पर निवेशक सावधानी बरतने लगते हैं।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट
आज की गिरावट में कई बड़े सेक्टरों के शेयरों में दबाव देखा गया। खास तौर पर:
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आईटी सेक्टर
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बैंकिंग सेक्टर
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ऑटो सेक्टर
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मेटल कंपनियां
इन सेक्टरों के कई प्रमुख शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
हालांकि कुछ डिफेंसिव सेक्टर जैसे FMCG और फार्मा में अपेक्षाकृत कम गिरावट देखने को मिली।
आईटी और बैंकिंग शेयरों पर दबाव
भारतीय बाजार में आईटी और बैंकिंग सेक्टर का बड़ा योगदान होता है। जब इन सेक्टरों के शेयर गिरते हैं तो पूरा बाजार दबाव में आ जाता है। आज आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। इसके अलावा कई बड़े बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी आई। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का इन सेक्टरों पर ज्यादा असर पड़ता है।
विदेशी निवेशकों की भूमिका
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FII) की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। अगर विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकालते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है। हाल के दिनों में कुछ विदेशी निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की है। इससे बाजार में गिरावट देखने को मिली। हालांकि घरेलू निवेशकों और म्यूचुअल फंड की खरीदारी बाजार को पूरी तरह गिरने से रोकने में मदद कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में इस तरह की गिरावट सामान्य है। जब बाजार तेजी से ऊपर जाता है तो बीच-बीच में सुधार (correction) आना स्वाभाविक होता है। निवेशकों को घबराने की बजाय लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान देना चाहिए। अगर बाजार में गिरावट आती है तो इसे अच्छे शेयरों में निवेश के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है।
आगे बाजार की दिशा क्या होगी
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी।
इनमें शामिल हैं:
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वैश्विक बाजारों की स्थिति
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मध्य पूर्व का तनाव
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कच्चे तेल की कीमतें
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विदेशी निवेशकों का रुख
अगर वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो बाजार फिर से तेजी पकड़ सकता है।
तीन दिनों की तेज़ी के बाद भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट निवेशकों के लिए एक संकेत है कि बाजार हमेशा सीधी दिशा में नहीं चलता।
निफ्टी के 420 अंक गिरने और सेंसेक्स के 75,300 के आसपास पहुंचने से यह साफ है कि बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है और लंबी अवधि में भारतीय बाजार की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है।
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