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राज्य

मार्च की शुरुआत में ही गर्मी का प्रकोप: हिमाचल के सेब बागानों और गेहूं की फसल पर मंडराया खतरा

Admin March 03, 2026 65 Views
मार्च की शुरुआत में ही गर्मी का प्रकोप: हिमाचल के सेब बागानों और गेहूं की फसल पर मंडराया खतरा

शिमला/मंडी, 3 मार्च — हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में इस वर्ष मार्च की शुरुआत से ही तापमान में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से सेब उत्पादक क्षेत्रों और गेहूं की फसल पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

तापमान में अचानक उछाल

मौसम विभाग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कई जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया है। फरवरी के अंतिम सप्ताह से ही दिन में तेज धूप और शुष्क हवाओं का असर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो फसलों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

सेब की फसल पर असर की आशंका

हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख सेब उत्पादक राज्यों में से एक है। राज्य की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा बागवानी पर निर्भर करता है। इस समय सेब के पेड़ों में फूल आने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अधिक तापमान के कारण फूल समय से पहले खिल सकते हैं, जिससे आगे चलकर फल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर असर पड़ सकता है।

मंडी जिले के एक बागवान ने बताया,
"इस बार फरवरी के अंत से ही गर्मी बढ़ गई है। अगर समय पर बारिश नहीं हुई तो फूल झुलस सकते हैं और उत्पादन कम हो सकता है।"

गेहूं की फसल भी प्रभावित

राज्य के मैदानी और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में गेहूं की फसल भी इस समय महत्वपूर्ण अवस्था में है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा तापमान से दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे उपज में कमी आ सकती है।

कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसानों को समय-समय पर आवश्यक सलाह दी जा रही है।

आर्थिक नुकसान की आशंका

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि तापमान सामान्य स्तर पर नहीं लौटा तो बागवानी और कृषि क्षेत्र को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है। पिछले वर्षों में भी असामान्य मौसम के कारण फसल उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई थी।

आगे क्या?

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में हल्की बारिश की संभावना है, जिससे कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि यदि शुष्क और गर्म मौसम जारी रहा तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सिंचाई प्रबंधन, मल्चिंग और समय पर फसल सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है।

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