लेह प्रोटेस्ट के बाद हिरासत में लिए गए सोनम वांगचुक को राहत, केंद्र ने NSA हटाया
भारत सरकार ने प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की हिरासत को लगभग छह महीने बाद समाप्त करने का फैसला किया है। यह फैसला उस समय आया है जब लद्दाख में हुए विरोध प्रदर्शनों और उनके बाद हुई गिरफ्तारी को लेकर देशभर में चर्चा हो रही थी। केंद्र सरकार के इस कदम को लद्दाख क्षेत्र में तनाव कम करने और संवाद शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
सोनम वांगचुक, जिन्हें शिक्षा सुधार और पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाता है, को 2025 में लद्दाख के लेह में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। अब केंद्र सरकार ने उनकी हिरासत को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है, जिससे उनके समर्थकों और स्थानीय लोगों में राहत की भावना देखी जा रही है।
कौन हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं।
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उन्होंने SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) की स्थापना की।
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“Ice Stupa” तकनीक के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
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उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
हाल के वर्षों में वांगचुक लद्दाख के पर्यावरण, स्थानीय अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा के मुद्दों को लेकर आंदोलन में सक्रिय रहे हैं।
क्यों हुई थी सोनम वांगचुक गिरफ्तारी?
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। यह गिरफ्तारी लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हुई थी।
दरअसल, लद्दाख में स्थानीय संगठनों और नागरिक समूहों ने केंद्र सरकार से दो प्रमुख मांगें की थीं:
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लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए
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संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत विशेष सुरक्षा मिले
इन मांगों को लेकर लेह में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए। लेकिन 24 सितंबर 2025 को एक प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। इस घटना में चार लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई।
सरकार का आरोप था कि वांगचुक के भाषण और बयान से भीड़ भड़क गई थी, जबकि वांगचुक ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण था।
National Security Act (NSA) क्या है?
सोनम वांगचुक को जिस कानून के तहत हिरासत में लिया गया था, वह राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) है।
यह एक कठोर कानून है जिसके तहत सरकार किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के एक साल तक हिरासत में रख सकती है, यदि उसे राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माना जाए।
NSA का इस्तेमाल आमतौर पर आतंकवाद, बड़े दंगे या गंभीर सुरक्षा खतरों के मामलों में किया जाता है। वांगचुक का मामला इसी कारण काफी चर्चा में रहा।
हिरासत खत्म करने का फैसला क्यों लिया गया?
केंद्र सरकार ने लगभग छह महीने बाद उनकी हिरासत समाप्त करने का फैसला किया।
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस निर्णय के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
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लद्दाख में स्थिति को शांत करना
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स्थानीय नेताओं और केंद्र के बीच संवाद बढ़ाना
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कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई
सरकार का कहना है कि यह फैसला “लद्दाख में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने और सभी पक्षों के साथ सार्थक बातचीत के लिए माहौल बनाने” के उद्देश्य से लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा था मामला
सोनम वांगचुक की पत्नी ने उनकी हिरासत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी।
कई महीनों से इस मामले की सुनवाई टलती रही और अदालत ने सरकार से यह भी पूछा था कि क्या हिरासत पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
सरकार द्वारा हिरासत समाप्त करने का फैसला इस कानूनी प्रक्रिया के बीच आया है।
लद्दाख आंदोलन का बड़ा मुद्दा क्या है?
लद्दाख आंदोलन केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का मुद्दा नहीं है। इसके पीछे क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक मांगें भी जुड़ी हुई हैं।
लद्दाख के कई संगठन इन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं:
- राज्य का दर्जा
- संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना
- स्थानीय लोगों के लिए नौकरी और जमीन की सुरक्षा
- पर्यावरण संरक्षण
2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से यह आंदोलन तेज हुआ है।
अब आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार सोनम वांगचुक की रिहाई लद्दाख में चल रहे आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
इसके बाद संभावित घटनाक्रम यह हो सकते हैं:
- केंद्र और स्थानीय नेताओं के बीच बातचीत
- लद्दाख के संवैधानिक दर्जे पर चर्चा
- क्षेत्र में राजनीतिक समाधान की कोशिश
हालांकि यह देखना बाकी है कि क्या सरकार लद्दाख की प्रमुख मांगों पर कोई ठोस फैसला लेती है या नहीं।
सोनम वांगचुक की हिरासत समाप्त करना केवल एक कानूनी निर्णय नहीं बल्कि लद्दाख की राजनीति और आंदोलन से जुड़ा बड़ा घटनाक्रम है। छह महीने तक चली इस हिरासत के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि सरकार और स्थानीय संगठनों के बीच बातचीत से क्षेत्र में स्थिरता और समाधान की दिशा में कदम बढ़ेंगे।
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